ज़िंदगी दे साह

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॥ पावन पाठ ॥

सिद्ध जोगी नाम ला दे ज़िन्दगी दे साह तू,

वेखी चल हुँदा की मुक़दराँ दे नाल तू,

सिद्ध जोगी नाम....

वरकतां वेखी चल कमाईयाँ विच पैनिया,

गमियाँ जो ज़िन्दगी च पल विणा रहनिया,

मन विचों निकलेंगा भूलेंगा हँकार तू,

वेखी चल हुँदा की मुक़दराँ दे नाल तू,

सिद्ध जोगी नाम....

कर्म जो किते माड़े दिल चो भुला लमी,

जोगी दर जा के वे तूँ भूल बख्शा लमी,

गुफा वाल आ जावी संग लै के नाल तू,

वेखी चल हुँदा की मुक़दराँ दे नाल तू,

सिद्ध जोगी नाम...

करीं बैठा जेहड़िया कमाईयाँ किथे जानियाँ,

पवन परीताँ जोगी नाम नाल पानियाँ,

अग्गे वेख तुरी चल जोगी जी दे राह वाल,

वेखेंगा कमाल तूं,

वेखी चल हुँदा की मुक़दराँ दे नाल तू,

सिद्ध जोगी नाम लादे,

सिद्ध जोगी नाम लादे,

सिद्ध जोगी नाम लादे,

सिद्ध जोगी नाम लादे,

सिद्ध जोगी नाम.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।