भोला मस्त मलंग ( हँसराज रघुवंशी )

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महलों की रानी, राजकुमारी ll,

क्यूँ बंध गई तेरे संग ll,

तूँ भोला,

मस्त मलंग,,, भोला, मस्त मलंग,,, ll

भोला मस्त मलंग अड़ियो,

गौरां हो गई तंग अड़ियो,

मेरा, भोला मस्त मलंग अड़ियो,

गौरां हो गई तंग अड़ियो ll

युगों युगों से, तेरी मेरी कहानी ll

तूँ मेरा दीवाना, मैं तेरी दीवानी ll

क्यों ना रंगू मैं तेरे रंग ll,

तूँ भोला,,,

मस्त मलंग,,, भोला, मस्त मलंग,,, l

गौरां ने बीज लई, हरी हरी मेहन्दी ll

मेरे, भोले ने बीज लई भंग अड़ियो,

गौरां हो गई तंग अड़ियो,,,

मेरा, भोला मस्त मलंग,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तूँ पीवे भोले, भाँग धतूरा ll

संग तूने बिठाया झुंड, भूतों का पूरा ll

वो हो गई रे, मैं यूँ तंग ll,

तूँ भोला,,,

मस्त मलंग,,, भोला, मस्त मलंग,,, l

गौरां दी उग गई, हरी हरी मेहंदी ll

मेरे, भोले दी उग गयी भंग अड़ियो

गौरां हो गई तंग अड़ियो,,,

मेरा, भोला मस्त मलंग,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सबको तूँ देवें, महल मुनारे ll

मुझकों बिठाया, कैलाशों के किनारें ll

जाने ना दिल की तूँ उमंग ll,

तूँ भोला,,,

मस्त मलंग,,, भोला, मस्त मलंग,,, l

गौरां ने तोड़ लई, हरी हरी मेहंदी ll

मेरे, भोले ने तोड़ लई भंग अड़ियो,

गौरां हो गई तंग अड़ियो,,,

मेरा, भोला मस्त मलंग,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं ओढू भोले, शाल दुशाले ll

तूँ ओढ़े भोले मृग की छालें,

मुझको ना भावे तेरा ढंग ll,

तूँ भोला,,,

मस्त मलंग,,, भोला, मस्त मलंग,,, l

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।