संवारा सुख दुःख का साथी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

संवारा सुख दुःख का साथी अपना साचा यार है,

अपना साचा यार है ये अपना ही दिलदार है,

संवारा सुख दुःख का साथी अपना साचा यार है,

सुख में साथी सब बने गये,

दुःख में न कोई और है,

दुःख में सब का साथ निभाए इसी यह सरकार है,

संवारा सुख दुःख का साथी ............

किसको क्या देना है प्यारे किसको क्या दरकार है,

बिन बोले बिन मंगे देता एसा ये दातार है,

संवारा सुख दुःख का साथी..........

भगती के है वस् में संवारा भगतो से इसे प्यार है,

करले भगती संवारे की यारो का यह यार है,

संवारा सुख दुःख का साथी ......

मतलब की है रिश्ते दरी मतलब का संसार है,

रोशन यार बना ले इस को ना एसी दकार है,

संवारा सुख दुःख का साथी .....

अमित बंसल हनुमानगढ़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।