रुनक झुनक पग नैवर बाजे

संत तुलसीदास
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

रुनक झुनक पग नेवर बाजे,

गजानंद नाचे,

गजानंद नाचे री,

रुनक झुनक पग नैवर बाजे,

गजानंद नाचे....

मूषक वाहन सूंड सुंडाला,

एक दन्त साजे,

गल पुष्पन की माल विराजे,

एक दन्त साजे,

रुनक झुनक पग नैवर बाजे,

गजानंद नाचे.....

पिता तुम्हारा है शिव शंकर,

नंदेश्वर साजे,

मात तुम्हारी है गिरजा,

सिंह चढ़ी गाजे,

रुनक झुनक पग नैवर बाजे,

गजानंद नाचे....

विघ्न निवारण मंगल करण,

राजन पति साजे,

तुलसीदास गणपति ने सुमिरे,

सुमिरया दुःख हटे,

रुनक झुनक पग नैवर बाजे,

गजानंद नाचे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।