दादा से मिलन होगा मेरी तकदीर है

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे दोनो हाथो में,

ऐसी लकीर है,

दादा से मिलन होगा,

मेरी तकदीर है,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख....

लिखता है लिखने वाला,

सोच समझ कर,

मिलना बिछुड़ना दादा,

होता समय पर,

इसमे मीन न मेख दादा,

इसमे मीन न मेख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

मेरे दोनो हाथो मे,

ऐसी लकीर है......

किस्मत का लेख कोई,

मिटा नही पायेगा,

कैसे मिलन होगा,

समय ही बताएगा,

मिटती नही है रेख दादा,

मिटती नही है रेख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

मेरे दोनो हाथो मे,

ऐसी लकीर है.....

ना वो दिन रहे ना,

ये दिन रहेंगे,

दादा तुम देख लेना,

जल्दी मिलेंगे,

इन हाथो को देख दादा,

इन हाथो को देख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

मेरे दोनो हाथो मे,

ऐसी लकीर है.....

कुंजन तेरी शरण में आया,

आकर के चरणों में,

शीश नवाया,

इन भक्तो को देख दादा,

इन भक्तो को देख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

लिखा है ऐसा लेख दादा,

लिखा है ऐसा लेख,

मेरे दोनो हाथो मे,

ऐसी लकीर है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।