खाले बाजरे की रोटी भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

खाले बाजरे की रोटी भोलेनाथ भांग पीनी भूल जाओगे

बाजरे की रोटी भोले बनी है कमाल की

देसी घी डाल मेरी डाटनी ने प्यार की

लस्सी भी लाया भोलेनाथ भांग पीनी भूल जाओगे

खाले बाजरे......

बाजरे का आटा रात थान से लायो

मीठा मीठा गुड़ बाबा यूपी से लायो

मज़्ज़े से खाले भोलेनाथ भांग पीनी भूल जाओगे

खाले बाजरे......

बाजरे की रोटी खाके ठण्ड नहीं लागे

लस्सी पीके भोले घनी मस्ती जाग्गे

डमरू बजायो दिन रात भांग पीनी भूल जाओगे

खाले बाजरे.......

तू भी खाले भोले गौरा ने खिलाई

गणपति ने खिलाई कार्तिक ने खिलाई

भगत करे फरयाद भांग पीनी भूल जाओगे

खाले बाजरे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।