सिर बांधे मुकुट खेलें होली

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सिर बांधे मुकुट खेले होली.....

पहली होली कैलाश में खेली,

गौरा शिव की व जोड़ी,

सिर बांधे मुकुट खेले होली.....

दूजी होली अवध में खेली,

राम सिया की व जोड़ी,

सिर बांधे मुकुट खेले होली.....

तीजी होली वृन्दावन खेली,

राधा श्याम की व जोड़ी,

सिर बांधे मुकुट खेले होली.....

चौथी होली अगनबा खेली,

पिया के संग भर भर जोड़ी,

सिर बांधे मुकुट खेले होली.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।