माँडोली वाले हे आबू वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी

वसुदेवी नंदन तुमको वंदन करते है हम आज,

है योगिस्वर शांति सुरिस्वर रख लेना तुम लाज,

आये हम तो शरण तुम्हारी,

सुनलो गुरुवर अरज हमारी,

मझधार में है भक्तो की नैया,

पार करो तुम बनके खिवैया,

खेवनहार तू ही पार लगईय्या,

माँडोली वाले हे आबू वाले,

शांति सुरिस्व हे गुरुदेवा,

वसुदेवी नंदन तुमको वंदन करते है हम आज,

है योगिस्वर शांति सुरिस्वर रख लेना तुम लाज॥

कलयुग में तेरी महिमा न्यारी कोई समझ न पावे ।

जो भी आये शरण मे तेरी मालामाल हो जावे ।।

दुखियों का सहारा तू पालनहारा

मिनल का गुरुवर तू एक सहारा

दिलबर भक्तो का तू ही है लाज बचइय्या

माँडोली वाले हे आबू वाले,

शांति सुरिस्व हे गुरुदेवा,

वसुदेवी नंदन तुमको वंदन करते है हम आज

है योगिस्वर शांति सुरिस्वर रख लेना लाज.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।