ठंडे पानी में कांप रहा है तन

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ठंडे पानी में कांप रहा है तन,

उठो उठो हे सूर्य गोसाई

अर्घ की घड़ी निकट है आई

जोहे है सब बाट तुम्हारे

तुमने कहां है देर लगाई

कष्ट के मारे मेरे प्रभुवर विचलित हो जाए ना मन

ठंडे पानी में कांप रहा है तन....

कोयल आई कुकन लागी,

सब ने आंखें खोली है,

जल बीच खाड़ हो बाट निहारे,

सब भक्तों की टोली है,

दर्शन दे दो दिनानाथ, भटक रहे हो तुम किस वन,

ठंडे पानी में कांप रहा है तन....

कब आओगे रूठे हो क्या,

दर्श को नैना तरसे है,

देख को तुमको धरती अम्बर,

कलिया मन में हांसे है,

हो अधीर सब बाट निहारे, जो ही है आओ भगवन,

ठंडे पानी में कांप रहा है तन....

आदित्यमल अब आ जाओ ना,

भेंट को तुम स्वीकार करो,

फैला अंधियारा धरती पर,

आकर तुम उजियार करो,

दे दो आशीर्वाद सभी को, जोहे हैं सब जन,

ठंडे पानी में कांप रहा है तन....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।