तेरी गुफा कोल घर पा लेना

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी गुफा कोल घर पा लेना,

असी तेरे पड़ोसी बन जाना,

तेरी मौज च मौजा मानागे,

तेरे चरणी लग असी तर जाना,

तेरी गुफा कोल घर पा लेना.....

अखियाँ नु भूख दर्शन दी रेहँदी,

तेरा विछोड़ा जिंद ना सेहँदी,

नित् मूरत तेरी देखांगे,

तेरे चरणा विच आ खड़ जाना,

तेरी गुफा कोल घर पा लेना.....

मुक्क जाऊ साडा आना जाना,

गुफ़ा कोल बन जाऊ टिकाना,

नित् उठ इशनान करावागे,

तन मन अर्पण कर जाना,

तेरी गुफा कोल घर पा लेना.....

‘शिवम् बिर्क’ दी आस हो पूरी,

दिल दी गल ना रहे अधूरी,

सानु चरणा दे विच दे था जोगी,

लखे दर ते सब कुछ हर जाना,

तेरी गुफा कोल घर पा लेना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।