जबसे गयो वृंदावन छोड़

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली,

ना खेली होली कन्हैया संग ना खेली होली,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

ना पहना मैंने माथे पर टीका ना किया कोई श्रंगार,

राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

ना पहले मैंने कानों में झुमके ना किया कोई श्रंगार,

राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

ना पहनो मैंने गले में हरबा ना किया कोई श्रंगार,

राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

ना पहने मैंने हाथों में कंगन ना किया कोई श्रंगार,

राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

ना पहनी मैंने कमर में तगड़ी ना किया कोई श्रंगार,

राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

ना पहनी मैंने पैरों में पायल ना किया कोई श्रंगार,

राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

ना आओगी मैंने सर पर चुनरिया ना किया कोई श्रंगार,

राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,

जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।