ओहदी ज़िन्दगी च कमी ना कोई रेह्न्दी

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॥ पावन पाठ ॥

ओहदी ज़िन्दगी च कमी ना कोई रेह्न्दी,

जो नाम जपे सतगुरु दा,

ओहदी हर एक मुराद पूरी हुंदी,

जो नाम जपे सतगुरु दा....

छड मुड़े तू सारे भरम भुलेखे,

चुप करके चित ला दियो लेखे,

फिर देखियो नज़ारे रूह लेंदी,

जो नाम जपे सतगुरु दा,

ओहदी ज़िन्दगी च .......

रहन नही दिंदा कोई फिकर ना फाके,

नाम धिओंदे जो गुरु शरनी आ के,

ओहदी दोनों जहानी शोभा हुंदी,

जो नाम जपे सतगुरु दा,

ओहदी ज़िन्दगी च .......

सतगुरु मेरे दियां गुजियाँ रमज़ा,

चाड देवे सचखंड ताई सुरता,

ओहदी चडी होई सूरत नज़ारे लेंदी,

जो नाम जपे सतगुरु दा,

ओहदी ज़िन्दगी च .......

जो सतगुरु दा नाम धिओंदा,

अन्दरो ही प्रभु दा ओ दर्शन पौन्दा,

अनहद बानी नु ओह अन्द्रो ही सुन्दा,

जो नाम जपे सतगुरु दा,

ओहदी ज़िन्दगी च .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।