हरि खेल रहे ब्रज में होली

गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरि खेल रहे ब्रज में होली,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

कौन गांव के कृष्ण कन्हाई,

और कहा के राधा गोरी,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

गोकुल के है कृष्ण कन्हाई,

बरसाने की राधा गोरी,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

का रंग मेरे कृष्ण कन्हाई,

का रंग है राधा गोरी,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

श्याम रंग मेरे कृष्ण कन्हाई,

गौर वरण राधा गोरी,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

को भर मारे रंग पिचकारी,

का की भीगी है चोली,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

कान्हा मारे भर पिचकारी,

राधा की है भीगी चोली,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

कौन रंग मारे भर पिचकारी,

को रंग भीगे ब्रज की गोरी,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

लाल रंग मारे भर भर कान्हा,

लाल रंग भीगे राधा गोरी,

हरि खेल रहे ब्रज में होली....

गीतकार-गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।