बाबोसा का दर जग में मशहूर

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - तेरी मेरी गला हो गई मशहूर

बाबोसा का दर जग में मशहूर,

एक बार चुरू धाम जाना है जरूर,

चलो चलिये, चलो द्वारे चलिये,

चलो द्वारे चलिये..

मुख पर बरसे है जिनके नूर,

प्यार लुटावे भक्तो पे भरपूर,

चलो चलिये, चलो द्वारे चलिये,

चलो द्वारे चलिये...

लगता है प्यारा, चुरू धाम रे,

बनते है भक्तो के जहाँ काम रे,

के जग में साँचा है दरबार,

यहाँ पर झुकता है संसार,

के आओ करले हम दीदार,

हाँ चलकर चुरू के दरबार....

भारत राजस्थान में चुरू है एक पावन धाम,

माँ छगनी का है ये दुलारा बाबोसा है नाम,

कोठारी कुल का है उजियारा,

चमका बनकर दिव्य सितारा,

लगता है प्यारा चुरू धाम रे ,

बनते है भक्तो के जहाँ काम रे,

के जग में साँचा है दरबार,

यहाँ पर झुकता है संसार,

के आओ करले हम दीदार,

हाँ चलकर चुरू के दरबार....

श्री बालाजी रूप में कलयुग के देव महान,

संकट उनके हरते पल में जो धरे इनका ध्यान,

सच्चे दिल से जिसने अर्जी लगाई,

दर पर उनकी हुई सुनवाई,

लगता है प्यारा चुरू धाम रे ,

बनते है भक्तो के जहाँ काम रे,

के जग में साँचा है दरबार,

यहाँ पर झुकता है संसार,

के आओ करले हम दीदार,

हाँ चलकर चुरू के दरबार,

बाबोसा का दर जग में मशहूर,

एक बार चुरू धाम जाना है जरूर,

चलो चलिये, चलो द्वारे चलिये,

चलो द्वारे चलिये..

मुख पर बरसे है जिनके नूर,

प्यार लुटावे भक्तो पे भरपूर,

चलो चलिये, चलो द्वारे चलिये,

लगता है प्यारा, चुरू धाम रे,

बनते है भक्तो के जहाँ काम रे,

के जग में साँचा है दरबार,

यहाँ पर झुकता है संसार,

के आओ करले हम दीदार,

हाँ चलकर चुरू के दरबार....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।