शँकर का डमरू बाजे रे दुखों का साया भागे रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( ॐ नमः शिवाए xllll )

शँकर का डमरू बाजे रे,,, ll, दुखों का साया भागे रे ll

( ॐ नमः शिवाए xllll )

दुखों का साया, भागे रे, भागे रे, भागे रे,

शँकर/भोले/शँकर का डमरू lll बाजे रे,

दुखों का साया भागे रे ll

इक्क हथ विच त्रिशूल है सजदा, "इक्क हथ दे विच माला" l

बरफ़ां दे विच बैठा शँकर, "करके रूप निराला" ll

^जटा में गंगा साजे रे ll, भक्तों को प्यारी लागे रे l

( ॐ नमः शिवाए xllll )

भक्तों को प्यारी, लागे रे, लागे रे, लागे रे,

शँकर/भोले/शँकर का डमरू lll बाजे रे,

दुखों का साया भागे रे ll

जब शिव शँकर नृत्य है करदा, "डम डम डमरू वजदा" l

धरती ते आकाश झूमदा, "बदल गढ़ गढ़ गज़दा" ll

^नंदी है आगे आगे रे ll, समय सुहाना लागे रे l

( ॐ नमः शिवाए xllll )

नंदी है आगे, आगे रे, आगे रे, आगे रे,

शँकर/भोले/शँकर का डमरू lll बाजे रे,

दुखों का साया भागे रे ll

अपने भक्तों को शँकर ने, "ऐसे वर दे डाले" l

चाहे हो सोने की लँका, "याँ हो दाम निराले" ll

^बैठा है सब कुछ त्यागे रे ll, कैलाश प्यारा लागे रे l

( ॐ नमः शिवाए xllll )

कैलाश प्यारा, लागे रे, लागे रे, लागे रे,

शँकर/भोले/शँकर का डमरू lll बाजे रे,

दुखों का साया भागे रे ll

( ॐ नमः शिवाए xllll )

*दुखों का साया, भागे रे, भागे रे, भागे रे,

शँकर/भोले/शँकर का डमरू lll बाजे रे,

दुखों का साया भागे रे ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।