इस शाने करम का क्या कहना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इस शाने करम का क्या कहना,

दर पे जो सवाली आते हैं...

खाली ना रही रहमत से तेरी,

दुख दर्द के मारो की झोली,

क्या तेरा करम है दर पे तेरे,

भरती है हजारों की झोली,

एक तेरी करीमी का सदका,

वो मन की मुरादे पाते हैं,

इस शाने करम का क्या कहना,

दर पे जो सवाली आते हैं....

दिन रात है मंगतो का फेरा,

खाली न गया मंगता कोई,

मोहताज यहां जो आते हैं,

वह झोलियां भर के जाते हैं,

इस शाने करम का क्या कहना,

दर पे जो सवाली आते हैं.....

इस दर की सखावत क्या कहिए,

क्या खूब सजा है दर तेरा,

मिलती है करम की भीख उन्हें,

दामन जो यहां फैलाते हैं,

इस शाने करम का क्या कहना,

दर पे जो सवाली आते हैं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।