कबूल मेरी विनती होनी चाहिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कबूल मेरी विनती होनी चाहिये ॥

तेरे पागलों में गिनती होनी चाहिये ॥

तेरे नाम का लेके सहारा ॥

चलता है परिवार हमारा ॥

कमी नही कोई होनी चाहिये ॥

तेरे पागलों में गिनती होनी चहिये...

तेरे सहारे चले जीवन नैय्या ॥

आप सम्भालो मन के खेवैय्या ॥

नैय्या मेरी पार बाबा होनी चाहिये ॥

तेरे पागलों में गिनती होनी चाहिये....

दुनिया की परवाह न कोई ॥

जो मरजी तानु समझे कोई ॥

नाम खुमारी चढी होनी चाहिये ॥

तेरे पागलों में गिनती होनी चाहिये ॥

Magician=manjeet सिंह

Pad player=9887203444

अजमेर राजस्थान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।