तारन दा वेला भवानी

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हुण तारन दा वेला भवानी,

हुण तारन दा वेला,

अब तारो माँ हुण तारो

अब तारो माँ हुण तारो

हुण तारन दा वेला भवानी....

अम्ब पक्के सन्ता फल पके,

बागे पकेया ई केला भवानी हुण तारन दा वेला,

हुण तारन दा वेला भवानी,

अब तारन दा वेला,

अब तारो माँ हुण तारो,

अब तारो माँ हुण तारो,

हुण तारन दा वेला भवानी....

अम्ब थले मै खड़ी उडीका,

हो गया वेला कवेला भवानी हुण तारन दा वेला,

हुण तारन दा वेला भवानी,

अब तारन दा वेला,

अब तारो माँ हुण तारो,

अब तारो माँ हुण तारो,

हुण तारन दा वेला भवानी....

रत्नागिरी पर्वत के ऊपर,

शेर फिरे अलबेला भवानी हुण तारन दा वेला,

हुण तारन दा वेला भवानी,

अब तारन दा वेला,

अब तारो माँ हुण तारो,

अब तारो माँ हुण तारो,

हुण तारन दा वेला भवानी....

भक्तजनो पर कृपा करिये,

भक्त ना जाये वेला भवानी हुण तारन दा वेला,

हुण तारन दा वेला भवानी,

अब तारन दा वेला,

अब तारो माँ हुण तारो,

अब तारो माँ हुण तारो,

हुण तारन दा वेला भवानी....

हुण तारन दा वेला भवानी,

हुण तारन दा वेला,

अब तारो माँ हुण तारो

अब तारो माँ हुण तारो

हुण तारन दा वेला भवानी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।