होली खेले लठमार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आज करले नैना चार बृज में होली है श्री राधे,

होली खेले लठमार बृज में होली है साँवरिया,

होली है साँवरिया बृज में होली है साँवरिया,

आज करले……

आज करले नैना चार बृज होली है श्री राधे.....

मैंने हाथ लई पिचकारी है श्री राधे,

मेरी पूरी त्यारी है साँवरिया,

करू रंगों....

करू रंगों की बौछार बृज में होली है श्री राधे,

आज करले नैना चार बृज होली है श्री राधे.....

मेरे लठ हाथ में भारी है साँवरिया,

तू पतली सी एक नारी है श्री राधे,

तो पे बहुत....

तो पे बहुत पड़ेगी मार बृज में होली है साँवरिया,

होली खेले लठमार बृज में होली है साँवरिया.....

आगे आजा दीवानी तू श्री राधे,

ना कर इतनी मनमानी तू साँवरिया,

काहे इतनी....

काहे इतनी करे तकरार बृज में होली है श्री राधे,

आज करले नैना चार बृज होली है श्री राधे......

कहे भूलन कैसा मेल बना साँवरिया,

होली का अदभुत खेल बना श्री राधे,

है सबसे....

है सबसे ऊँचा प्यार बृज में होली है साँवरिया,

होली खेले लठमार बृज में होली है साँवरिया,

होली है साँवरिया बृज में होली है साँवरिया,

आज करले नैना चार बृज में होली है श्री राधे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।