प्रेम से बोलो श्री बाँके बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : श्री बाँके बिहारी तेरी आरती गाऊ

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी

हम आये प्रभु शरण तिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

मोर मुकट है बन्सी धारी,

कानन कुण्डल लट घुँघराली,

देख छवि मैं जाऊ बिलहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी...

श्याम स्वरूप मेरे बांके बिहारी,

अंग चमक मेरी राधा प्यारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी....

फूलो में सज रहें बांके बिहारी,

संग सजे मेरी राधा प्यारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी....

हम आये प्रभु शरण तुम्हारी,

शरण तुम्हारी प्रभु शरण तुम्हारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी....

संकटमोचन बाँके बिहारी,

कृपामयी मेरी राधा प्यारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी....

जो कोई तुम्हे प्रेम से ध्याते,

सो ही मनवांछित फल पाते,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी.....

बालक के अपराध ना गिनना,

भूल पाप किये मैने भारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी,

बांके बिहारी प्रभु कुंज बिहारी,

प्रेम से बोलो श्री बांके बिहारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।