सांई सुरतीया बड़ी प्यारी

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॥ पावन पाठ ॥

साई सुरतिया तुमरी बड़ी प्यारी,

साई सुरतिया तुमरी बड़ी प्यारी,

साई मैं तुम्हे देखता रहूं, साई मैं तुम्हे देखता रहूं,

जाऊ चरणों में, जाऊ चरणों में तुमरे बलिहारी,

साई मैं तुम्हे देखता रहूं साई मैं तुम्हे देखता रहूं,

साई सुरतिया तुमरी बड़ी प्यारी, साई मैं तुम्हे देखता रहूं.....

मैं तो दर पे ही तेरे आऊंगा भेट श्रद्धा की मैं चढ़ाऊंगा,

भेट श्रद्धा की मैं चढ़ाऊंगा,

सारे मंगतो का तू सहारा है साई सबका ही तू दुलारा है,

साई सबका ही तू दुलारा है,

साई तुझपे मैं जाऊ वारि वारि, साई तुझपे मैं जाऊ वारि वारि,

साई मैं तुम्हे देखता रहूं साई मैं तुम्हे देखता रहूं,

साई सुरतिया तुमरी बड़ी प्यारी, साई मैं तुम्हे देखता रहूं.....

शिरडी वो तेरी कितनी प्यारी है वहां होती होली ईद दीवाली है,

वहां होती होली ईद दीवाली है,

रूप तेरा कितना सुहाना है साईं मुझको भी शिरडी आना है,

साईं मुझको भी शिरडी आना है,

साई अपना बना लो तुम पुजारी, साई अपना बना लो तुम पुजारी,

साई मैं तुम्हे देखता रहूं साई मैं तुम्हे देखता रहूं,

साई सुरतिया तुमरी बड़ी प्यारी, साई मैं तुम्हे देखता रहूं.....

झोली तेरे ही आगे फैलाऊ साई तेरा जोगी में बन जाऊ,

साई तेरा जोगी में बन जाऊ,

तेरे दर से ना खाली ऊंगा सबको मिलता है मैं भी पाऊंगा,

सबको मिलता है मैं भी पाऊंगा,

कब आएगी साई मेरी बारी, कब आएगी साई मेरी बारी,

साई मैं तुम्हे देखता रहूं साई मैं तुम्हे देखता रहूं,

साई सुरतिया तुमरी बड़ी प्यारी, साई मैं तुम्हे देखता रहूं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।