साई याद आने लगे

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॥ पावन पाठ ॥

( दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई

जे सुख में सुमिरन करो दुःख कहे को होय। )

मुझको भूले हुए साई याद आने लगे,

दुःख जब मेरे हद से बढ़ जाने लगे,

मुझको भूले हुए साई याद आने लगे॥

अर्श से गिर गए तो गिरे इस तरह,

संभल जाने में हमको ज़माने लगे,

मुझको भूले हुए साई याद आने लगे॥

मन में है जिनके श्रद्धा सबुरी,

साई आस पूरी उनकी करने लगे,

मुझको भूले हुए साई याद आने लगे॥

जब भी राते अँधेरी हुई राह में,

साई लो बांके रह जगमगाने लगे,

मुझको भूले हुए साई याद आने लगे,

साई याद आने लगे.....

साई साई साई साई साई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।