आप ने अपना बनाया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आप ने अपना बनाया मेहरबानी आपकी,

हम भक्तों को चरणों से लगाया मेहरबानी आपकी॥

हम ना भूलेंगे कभी एहसान प्रभुजी आपका,

अपने चरणों से लगाया मेहरबानी आपकी,

आप ने अपना बनाया मेहरबानी आपकी.....

हर मुरादें पूरी होती तेरे इस दरबार में,

हर जुबां पर आज सतगुरु है कहानी आपकी,

आप ने अपना बनाया मेहरबानी आपकी....

दिल से चाहते हैं तुम्हें हम कैसे भूलेंगे भला,

अब तो यह दिल भी हमारा है निशानी आपकी,

आप ने अपना बनाया मेहरबानी आपकी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।