भोग रखा रहा फूल मुरझा गए

पारंपरिक
विष्णु भगवान आरती विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

आप आए नहीं और सुबह हो गई,

मेरी पूजा की थाली धरी रह गई,

भोग रखा रहा फूल मुरझा गए,

आरती भी धरी की धरी रह गई.....

मुझसे रूठे हो क्यों आप आते नहीं,

कोई अपराध मेरा बताते नहीं,

देखते-देखते सांसे रुकने लगी,

क्या बुलाने में मेरे कमी रह गई,

आप आए नहीं

हाल बेहाल है आप आओ हरि,

मन की मोती की माला गले में पड़ी,

वरना मन के यह मोती बिखर जाएंगे,

कौन सी भावना की कमी रह गई,

आप आए नहीं....

ध्यान भी हो गया ज्ञान भी हो गया,

सारे जग से यह मन अब अलग हो गया,

इतना होते हुए ना तुम्हें पा सकी,

इच्छा दर्शन की मन में बनी रह गई,

आप आए नहीं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।