राम नाम की गंगा बहे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम नाम की गंगा बहे यहां में कोई-कोई नहाए,

हरि नाम की जमुना बहे यहां में कोई कोई नहाए,

राम नाम की गंगा बहे यहां में कोई-कोई नहाए॥

ब्रह्मा भी नहामें यहां में विष्णु भी नहामें

शंकर भी नहामें यहां में डमरु बजाए यहां में कोई-कोई नहाए,

राम नाम की गंगा....

रामा भी नहामें यहां में लक्ष्मण भी नहामें,

हनुमत भी नहामें यहां में राम गुण गाए यहां में कोई-कोई नहाए,

राम नाम की गंगा.....

दाऊ भी नहावे श्रीदामा भी नहावे,

कान्हा नहावे यहां में मुरली बजाए यहां में कोई-कोई नहाए,

राम नाम की गंगा....

ऋषि मुनि सब संत भी नहाए,

सारे भक्त नहामें यहां में डुबकी लगाए यहां में कोई-कोई नहाए,

राम नाम की गंगा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।