गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

पूरा ध्यान लगा,

गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे,

तुझे गले से लगाएंगे,

मन की अखियां खोल,

मन की अखियां खोल,

तुझको दर्शन वो कराएंगे,

तुझे गले से लगाएंगे,

पुरा ध्यान लगा,

गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे....

कृपा की छाया में,

बिठाएंगे तुमको,

जो दर इनके जाओगे,

उनकी दया दृष्टि,

जब जब पड़े तुझ पर,

भव से तर जाओगे,

ऐसा है विश्वास,

ऐसा है विश्वास,

मन में ज्योत वह जगाएंगे,

तुझे गले से लगाएंगे,

पुरा ध्यान लगा,

गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे....

है राम रमैया जो,

है कृष्ण कन्हैया जो,

वही मेरे ईश्वर है,

निष्काम राहों पर,

चलना सिखाए जो,

वही मेरे जगदीश है,

प्रेम से पुकार,

प्रेम से पुकार तेरे,

पास वह तब आएंगे,

तुझे गले से लगाएंगे,

पुरा ध्यान लगा,

गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे....

ऋषियों ने मुनियों ने,

गुरु की महिमा का,

किया गुणगान है,

गुरु के चरणों में,

झुकती सकल सृष्टि,

झुके भगवान हैं,

महिमा है अपार,

महिमा है अपार,

सच की राह वो दिखाएंगे,

तुझे गले से लगाएंगे,

पुरा ध्यान लगा,

गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे.....

पूरा ध्यान लगा,

गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे,

तुझे गले से लगाएंगे,

मन की अखियां खोल,

मन की अखियां खोल,

तुझको दर्शन वो कराएंगे,

तुझे गले से लगाएंगे,

पुरा ध्यान लगा,

गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।