काहे काया का करता गुमान रे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

काहे काया का करता गुमान रे,

सुबह शाम जपो राम जपो राम।।

हरि चरणों से प्रीत लगा के,

जीवन सफल बना अपना,

रहा हरि से सदा अनजान रे,

सुबह शाम जपो राम जपो राम।।

खेलों में सब उम्र गंवा दी,

राम भजन ना किया तूने,

किया माया का तूने अभिमान रे,

सुबह शाम जपो राम जपो राम।।

पूर्व जनम के पुण्य के कारण,

यह मानव तन पाया है,

काहे भुला है तू हरि नाम रे,

सुबह शाम जपो राम जपो राम।।

हरि भक्ति के अमृत की जो,

एक बूंद भी तू पीले,

पुरे होंगे तेरे अरमान रे,

सुबह शाम जपो राम जपो राम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।