चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी,

ऊंची अटारी मेरी ऊंची अटारी,

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी....

सांस मेरी को डर मत करियो,

वह तो है बुढ़िया बेचारी मेरे बांके बिहारी,

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी....

जिठनी मेरी को डर मत करियो,

उनसे हवेली मेरी न्यारी मेरे बांके बिहारी,

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी....

देवरानी मेरी को डर मत करियो,

छोटी बहन हमारी मेरे बांके बिहारी,

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी....

ननंद मेरी को डर मत करियो,

वह तो है कन्याकुमारी मेरी बांके बिहारी,

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी....

बलम मेरे को डर मत करियो,

वह तो है तेरा पुजारी मेरे बांके बिहारी,

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी....

पड़ोसी मेरे को डर मत करियो,

उनकी तो दुनिया है न्यारी मेरे बांके बिहारी,

चले आना बांके बिहारी मेरी ऊंची अटारी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।