हिमाचल सूरी की महिमा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - सेठो की क्या करे नौकरी

हिमाचल सुरिस्वर की महिमा, जग में बड़ी महान है,

नाकोंडा के तीर्थो उधारक, जिनशासन की शान है॥

घाणेराव में दीक्षा लेकर, जो बन गये थे वैरागी,

हित विजय गुरु को पाकर, बने जिन शासन अनुरागी,

गाँव शहर में विचरण करके बने मेवाड़ की शान है,

नाकोंडा के तीर्थो उधारक, जिनशासन की शान है॥

नाकोंडा जी मे जाकर के करी साधना थी गुरुवर ने,

भेरूजी की प्रतिस्ठा कराई, यश फैला दुनिया भर में,

भेरूजी का पर्चा भारी, पूजे सारा जहान है,

नाकोंडा के तीर्थो उधारक, जिनशासन की शान है॥

मुंडारा आदिनाथ की, चौकी को बना दी एक रात में,

गुरु वचन से बड़ी मिठाई थी लब्धी जिनके हाथ मे ।।

कहे किशन और दिलबर सबसे गुरुवर ललित के प्राण है ।

नाकोंडा के तीर्थो उधारक, जिनशासन की शान है॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।