वक्त है कम लंबी मंजिल

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॥ पावन पाठ ॥

वक्त है कम लंबी मंजिल,

तुम्हें तेज कदम चलाना होगा,

हे परम तपस्या के पथी को,

तुम्हें नूतन पथ रचना होगा,

वक्त है कम लंबी मंजिल,

तुम्हें तेज कदम चलाना होगा॥

जीवन के समरगन में है,

विजय बनना आसन नहीं,

वह सतत बिंदू कुछ पल होंगे,

जिनका पहले से ज्ञान नहीं,

अंजान क्षितिज के कोने में,

इंसान नया चुनन होगा,

हे परम तपस्या के पथी को,

तुम्हें नूतन पथ रचना होगा,

वक्त है कम लंबी मंजिल,

तुम्हें तेज कदम चलाना होगा॥

साधना के और सुविधा के,

छैया में ना सोजना,

मयके प्रलोभन प्यारे हे,

इनके वस मे ना हो जाना,

हे परम तपस्या के पथी को,

तुम्हें नूतन पथ रचना होगा,

वक्त है कम लंबी मंजिल,

तुम्हें तेज कदम चलाना होगा॥

आनंद की अनमोल घड़ी में कोड़ी के,

भाव ना बिक जाना,

चलती साँसे अग्नत मोड़ पर,

आकार के ना रुक जाना,

हे परम तपस्या के पथी को,

तुम्हें नूतन पथ रचना होगा,

वक्त है कम लंबी मंजिल,

तुम्हें तेज कदम चलाना होगा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।