साई भाग्य विधाता

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चल साई के द्वार, चल साई के द्वार,

साई भाग्य विधाता उसकी महिमा अपरम्पार,

चल साई के द्वार, चल साई के द्वार,

साई भाग्य विधाता उसकी महिमा अपरम्पार,

चल साई के द्वार, चल साई के द्वार,

साई भाग्य विधाता उसकी महिमा अपरम्पार॥

नैना मेरे भर आये,

शिरडी कोई ले जाये,

कोई तो मेरा अरमान निकले,

साई के दर्शन पाए,

चल आ चल आ चल आ,

मैं साथ तेरे साई कहते है,

ये तुझसे बार बार

चल साई के द्वार, चल साई के द्वार,

साई भाग्य विधाता उसकी महिमा अपरम्पार॥

जय साई जय बोलो जय साई,

जय साई जय बोलो जय साई,

दर्द सहा नहीं जाये,

साई गले से लगाए,

साई की मैं हूँ पुजारन,

दिल मेरा भर आये,

साई की ऐसी लगन लगी है,

मन करे हाय हाय,

चल आ चल आ चल आ,

मैं साथ तेरे साई कहते है,

ये तुझसे बार बार

चल साई के द्वार, चल साई के द्वार,

साई भाग्य विधाता उसकी महिमा अपरम्पार॥

जो गुजरी है मुझ पे,

साई तुझे सब पता है,

साई से नैन लड़ेंगे,

दर्द का तू ही आसरा है,

जिसने दिल से तुझको पुकारा,

साई ने दिया है सहारा,

चल आ चल आ चल आ,

मैं साथ तेरे साई कहते है,

ये तुझसे बार बार

चल साई के द्वार, चल साई के द्वार,

साई भाग्य विधाता उसकी महिमा अपरम्पार॥

जय साई जय बोलो जय साई,

जय साई जय बोलो जय साई,

साई मेरा है मुकद्दर,

कहता है सूफी हमसर,

साई ने इतना दिया है,

यात्रा को किया है समंदर,

साई जैसा को नहीं है,

दुनिया में ऐसा रहबर,

चल आ चल आ चल आ,

मैं साथ तेरे साई कहते है,

ये तुझसे बार बार

चल साई के द्वार, चल साई के द्वार,

साई भाग्य विधाता उसकी महिमा अपरम्पार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।