लाले लाल चुनरिया चमके

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय हो मईया,

जय जय हो मईया,

जय जय हो मईया,

लाले लाल चुनरिया चमके,

मईया के सुरतिया दमके,

हां हां हां लाले लाल चुनरिया चमके,

मईया के सुरतिया दमके,

मन करे रही मंडप में दिनों रात रे,

जय हो

मईया के साथ रे,

हम ता करब आपन सुख दुःख वाला बात रे,

मईया के साथ रे,

मईया के साथ रे......

मूर्ति सोझा ता जगमग दीप जरता,

देखी घरे जाये के नाही दिल करता,

दिल करता, दिल करता,

हां मूर्ति सोझा ताजगमग दीप जरता,

देखी घरे जाये के नाही दिल करता,

रह के निर्जल हम बिताईब नवरात्र रे,

जय हो

मईया के साथ रे,

हम ता करब आपन सुख दुःख वाला बात रे,

मईया के साथ रे,

मईया के साथ रे.....

श्याम देहाती आज़ाद जईसे लागल बाड़े हो,

माई के भक्ति में दुनू भाई पागल बाड़े हो,

दुनू भाई, दुनू भाई,

दीपक पुतुल अमित जईसे लागल बाड़े हो,

माई के भक्ति में तीनो भाई पागल बाड़े हो,

संगे रहब केहू कही ना अनाथ रे,

जय हो

मईया के साथ रे,

हम ता करब आपन सुख दुःख वाला बात रे,

मईया के साथ रे,

मईया के साथ रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।