ओम नम शिवाय

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय

ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय

कैलाश पर्वत तो शिवजी आये

विच मथुरा दे आये

हरी ओम नमः शिवाय

बाबे नन्द दी पू छन हवेली

घर घर अलख जगाए

हरी ओम नमः शिवाय

ले भिखिया नन्द रानी निकली

मोतिया दे थाल भराये

हरी ओम नमः शिवाय

क्या करने तेरे हीरे मोती

शिव हरी दर्शन को आये

हरी ओम नमः शिवाय

ले भिखिया जोगी जायो घरां नू

मेरा बालक न डर जाये

हरी ओम नमः शिवाय

ये बालक नहीं डरने वाला

त्रिलोकी नाथ कहाये

हरी ओम नमः शिवाय

दोहां दोहां दे नेतर mil गए

शिवां ने दर्शन पाए

हरी ओम नमः शिवाय

चार परिकर्मा लाईआं शिवां ने

चरणी शीश नवाये

हरी ओम नमः शिवाय

माथे शिवां दे चन्द्रमा विराजे

गल शेषनाग लटकाए

हरी ओम नमः शिवाय

खब्बे हाथ त्रिशूल शिवां दे

डम डम डमरू बजाये

हरी ओम नमः शिवाय

जो कोई भोले डा यश गावे

ओहदा जनम मरण छुट्ट जावे

हरी ओम नमः शिवाय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।