रंगीला फागुन आयो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रंगीला फागुन आयो सा, सुरंगों रंगीला फागुन आयो,

मिल बीत गया जुदाई का मौसम आयो,

मैं तो हो गया थारे, मंदिर येने द्वार मिलले सांवरिया,

म्हारो कब से करा हा इंतजार मिलले सांवरिया......

कई दीना से आस लगाया,

श्याम मिलण ने सेवक आया,

ये तो लाया, लाया,

सारो परिवार मिलले सांवरिया,

मैं तो हो गया थारे, मंदिर येने द्वार मिलले सांवरिया......

रूतिया बसंती फ़ाग की आई,

सीड़ी सीड़ी चाले पुरवाई,

देखो बाघा में छाई है बहार मिलले सांवरिया,

मैं तो हो गया थारे, मंदिर येने द्वार मिलले सांवरिया......

रिमझिम रिमझिम नैना बरसे,

भर भर आवे म्हारो हिबड़ो तरसे,

अब ना करो त्रिपुरार मिलले सांवरिया,

मैं तो हो गया थारे, मंदिर येने द्वार मिलले सांवरिया......

खाटु धाम बुलता रहियो,

म्हारे घर आता जाता रहियो,

अर्जी ‘संजू’ की करो स्वीकार मिलले सांवरिया,

मैं तो हो गया थारे, मंदिर येने द्वार मिलले सांवरिया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।