बाबा भोलेनाथ मेरी नैयाँ को उबारो ना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बाबा भोलेनाथ, मेरी नैयाँ को उबारो ना,

बाबा भोले नाथ,

मेरे केवटिया बन जाओ ना,

बाबा भोले नाथ,

बाबा भोलेनाथ, मेरी नैयाँ को उबारो ना,

बाबा भोले नाथ....

तन पे लगाये भस्म, अंग छाल सोहे है,

सरपों की माला है, धारे जो सिर पे गंगा,

माथे पे प्यारा चन्द्र, ये डमरू वाला है,

विष पीकर भोले ने, विष पीकर भोले ने,

सब देवों का मान बढ़ाया है,

भक्तों का काम बनाया है,

बाबा भोले नाथ,

बाबा भोलेनाथ, मेरी नैयाँ को उबारो ना,

बाबा भोले नाथ....

जग का सहारा तू, गौरा का प्यारा तू,

खाली ना लौटाना, विश्वास पूरा है,

कर देगा मेरा काम, जो दिल में सोचा है,

बालक तेरा आज, बालक तेरा आज,

विष के सागर से पुकारे,

यो रो रो नीर बहावे हैं,

बाबा भोले नाथ,

बाबा भोलेनाथ, मेरी नैयाँ को उबारो ना,

बाबा भोले नाथ....

गरजी ने भोलेनाथ, अरजी लगा दी है,

मरजी अब तेरी है, उद्धार कर देना,

तुम माफ कर देना, कहता जो मेरी है,

शिव शंकर भोलेनाथ, शिव शंकर भोलेनाथ,

शरणे " दास " तेरे आया है,

बाबा की सिफारिश लाया हे,

बाबा भोले नाथ,

बाबा भोलेनाथ, मेरी नैयाँ को उबारो ना,

बाबा भोले नाथ....

भजन गायक ( मनीष अनेजा )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।