भोले देने वाले हैं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले देने वाले हैं, हम लेने वाले हैं ll

द्वार, ख़ाली हाथ नहीं जाना ll,

जिसे चाहिए ll, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना ll

( जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना )

भोले देने वाले हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

रोज़ रोज़ मांगने की, आदत ही छोड़ दो l

जिस को जितना चाहिए, वो भोले से बोल दो l

^सावन का महीना है, कावड़ का महीना है ll

कावड़ियो न, शर्माना,

जिसे चाहिए ll, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना ll

( जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना )

भोले देने वाले हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मीलों मील चलके जो, द्वारे पे आता l

सदा डमरु वाले को, कावड़िया भाता l

^कावड़ ले के जाना है, झोली भरके आना है ll

थोड़ा सा, कष्ट उठाना,

जिसे चाहिए ll, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना ll

भोले देने वाले हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हाथ मे ना आए तो, झोली पसार ले l

खुल्ला खज़ाना है, भोले के द्वार पे l

^झोली भर जाए तो, काम बन जाए तो ll

कावड़ियो, बोल बम गाना,

जिसे चाहिए ll, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना ll

( जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना )

भोले देने वाले हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

छोटी बड़ी कावड़ का, मोल नहीं आंकते l

भक्तों की भक्ति के, भाव को है मानते l

^भोले को मनाना है, गंगा जल लाना है ll

*मौका यह, चूक नहीं जाना,

जिसे चाहिए ll, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना ll

( जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना, उठाना,

जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना )

भोले देने वाले हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।