हे शिव शंकर हे दया निधि

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे शिव शंकर है दयानिधि,

हे करुणा कर है अविनाशी,

हे परमपिता है विश्वेस्वर,

हे सर्वेस्वर घट घट वासी।।

हम आये हैं तेरे द्वारे,

तू अपनाले या ठुकरा दे,

न छोड़ेंगे तेरा द्वारा,

हे जगतपिता है कैलाशी,

हे शिव शंकर है दयानिधि,

हे करुणा कर है अविनाशी।

छाए हैं दुख के बादल,

चहु और हे छाई अंधियारी,

अब तू ही दिखा कोई राह हमे,

हे गंगाधर है सुखराशि,

हे शिव शंकर है दयानिधि

हे करुणा कर है अविनाशी।

तूँ दे ऐसा वरदान हमें,

हम तेरे ही नित गुण गाये,

और प्यास बुझादे दर्शन से,

ये अँखिया दर्शन की प्यासी,

हे शिव शंकर है दयानिधि,

हे करुणा कर है अविनाशी,

हे परमपिता है विश्वेस्वर,

हे सर्वेस्वर घट घट वासी।।

गीतकार / गायक-राजेंद्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।