भोले को मेरे क्रोध जो आता है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( महादेव भगवान् को आया जब जब क्रोध,

तीन लोक में कोई भी कर ना सका विरोध,

खुश हो जाते अगर दे वरदान तुरंत,

अगर क्रोध में आ गए कर देते है अंत,

भोले तेरे क्रोध का संजो करे बखान,

हम पर क्रोध ना कीजिये शम्भु दया निधान। )

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

शिव शंकर के क्रोध को कोई,

शिव शंकर के क्रोध को कोई,

रोक ना पाता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

शिव शंकर के क्रोध को कोई,

शिव शंकर के क्रोध को कोई,

रोक ना पाता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है।

खोज लिया मेने आदि अंत को ब्रम्हा जी बोले ओ,

खोज लिया मेने आदि अंत को ब्रम्हा जी बोले,

तब ब्रम्हा के पांच बिसर को काट दिए भोले,

तब ब्रम्हा के पांच बिसर को काट दिए भोले,

ब्रम्हा जी ने झूठ कहा था,

ब्रम्हा जी ने झूठ कहा था,

शिव को ना भाता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है।

देवी सती ने हवन कुण्ड में प्राण जो त्यागा था हो,

देवी सती ने हवन कुण्ड में प्राण जो त्यागा था,

राजा दक्ष पर महादेव का क्रोध भी जागा था हो,

राजा दक्ष पर महादेव का क्रोध भी जागा था,

वीरभद्र वहां राजा दक्ष का,

वीरभद्र वहां राजा दक्ष का,

शीश उडाता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है।

द्वारपाल बनकर बालक ने शिवजी को रोका हो,

द्वारपाल बनकर बालक ने शिवजी को रोका,

गुस्से में त्रिशूल चलाये खा गये शिव धोखा हो,

गुस्से में त्रिशूल चलाये खा गये शिव धोखा,

पति को पुत्र का परिचय देती,

पति को पुत्र का परिचय देती,

गिरिजा माता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है।

त्रिपुरासुर जो तीन असुर थे पाप करे भारी हो,

त्रिपुरासुर जो तीन असुर थे पाप करे भारी,

धनुष बाण मारकर इनको शिव हुए त्रिपुरारी हो,

धनुष बाण मारकर इनको शिव हुए त्रिपुरारी,

हर पापी का भोले हरदम,

हर पापी का भोले हरदम,

पाप मिटाता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है।

शिव की भंग समाधि करने फुल के बाण चलाये हां,

शिव की भंग समाधि करने फुल के बाण चलाये,

आंख तीसरी खोल निरंजन कामदेव जल जाए हो,

आंख तीसरी खोल निरंजन कामदेव जल जाए,

संजो शिव को क्रोध ना आये,

संजो शिव को क्रोध ना आये,

जग ये मनाता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है,

भोले को मेरे क्रोध जो आता है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।