धूणी सांगलिया

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॥ पावन पाठ ॥

धूणी सांगलिया दुनिया मे देखो धाम निराली रे धूणी सांगलिया,

धाम निराली है दुनिया मे धूणी सरकार निराली है धूणी सांगलिया,

धूणी सांगलिया दुनिया मे देखो धाम निराली रे धूणी सांगलिया॥

अखिल भारतीय धूणी सांगलिया, भक्ता रे मन भावे जी,

मनसा पूरण करे भक्ता की है रखवाली वो,

धूणी सांगलिया.....

अखंड ज्वाला ह माँ थारी, जग में महिमा भारी जी,

जग जननी है जगदम्बा जगत सवाली वो,

धूणी सांगलिया.....

शरणे आया रा कारज सारो, नैया पार लगावो जी,

हिरदा रा पट खोल भवानी भरदे झोली वो,

धूणी सांगलिया.....

धूणी धाम धरती पे जोरकी, दुनिया मे सरनाम जी,

विनोद महिमा करे मोकली गावे होली वो,

धूणी सांगलिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।