तीन लोक में सबसे दयालु

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तीन लोक में सबसे दयालु शिव शंकर भगवान्,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान,

करुणा सागर जैसी गहरी महिमा है आसमान,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान,

तीन लोक में सबसे दयालु शिव शंकर भगवान्,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान।

अमरनाथ की अमर कहानी गुफा है प्यारी एक सुहानी,

अमरनाथ की अमर कहानी गुफा है प्यारी एक सुहानी,

यहाँ पे शिवलिंग कैसे बनता ना जाने ज्ञानी विज्ञानी,

यहाँ पे शिवलिंग कैसे बनता ना जाने ज्ञानी विज्ञानी,

इसी गुफा में पार्वती को दिए अमर वरदान,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान,

तीन लोक में सबसे दयालु शिव शंकर भगवान्,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान।

तुमने ही संसार बनाया कण कण तेरा रूप समाया,

तुमने ही संसार बनाया कण कण तेरा रूप समाया,

धरा गगन पाताल तुम्ही हो तीनो लोक तुम्हारी छाया,

धारा गगन पाताल तुम्ही हो तीनो लोक तुम्हारी छाया,

भोले तुम तो जगत पिता हो जग तेरी संतान,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान,

तीन लोक में सबसे दयालु शिव शंकर भगवान्,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान।

महाकाल की शाही सवारी सबसे सुन्दर सबसे प्यारी,

महाकाल की शाही सवारी सबसे सुन्दर सबसे प्यारी,

कहलाते उज्जैन के राजा अजब रूप की है बलिहारी,

कहलाते उज्जैन के राजा अजब रूप की है बलिहारी,

महाकाल के दर्शन से हो जाता है कल्याण,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान,

तीन लोक में सबसे दयालु शिव शंकर भगवान्,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान।

भोले का श्रृंगार निराला तन पर राख कमर मृगछाला,

भोले का श्रृंगार निराला तन पर राख कमर मृगछाला,

माथे चंदा सर पर गंगा गले में है सर्पो की माला,

माथे चंदा सर पर गंगा गले में है सर्पो की माला,

अलख निरंजन शिव का संजो दिल से करो गुणगान,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान,

तीन लोक में सबसे दयालु शिव शंकर भगवान्,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान।

करुणा सागर जैसी गहरी महिमा है आसमान,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान,

तीन लोक में सबसे दयालु शिव शंकर भगवान्,

ऐसा कोई नहीं है महान, ऐसा कोई नहीं है महान....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।