शंभु शंभु देवा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा।

सर पे गंगा विराजे,

माथे पर चंद्रमा,

सर पे गंगा विराजे,

माथे पर चंद्रमा,

भस्म अंग पे लगाए,

मदमाते चले कहाँ,

भस्म अंग पे लगाए,

मदमाते चले कहाँ,

तीन नेत्र छाल वस्र,

पाचमुख दसभुजा,

मृत्युंजय अजर अमर,

ना कोई उनसा यहाँ,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा।

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

शंभु शंभु देवा

डमरू एक हाथ में,

दूजे में त्रिशूल धरा,

डमरू एक हाथ में,

दूजे में त्रिशूल धरा,

नागवासुकी को कंठ में धारण करा,

नागवासुकी को कंठ में धारण करा,

शिवशक्ती दोनों को ही आप में पूरक किया,

मृत्युंजय अजर अमर ना कोई उनसा यहाँ,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा।

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

शंभु शंभु देवा

सर पे गंगा विराजे,

माथे पर चंद्रमा,

सर पे गंगा विराजे,

माथे पर चंद्रमा,

भस्म अंग पे लगाए,

मदमाते चले कहाँ,

भस्म अंग पे लगाए,

मदमाते चले कहाँ,

तीन नेत्र छाल वस्र,

पाचमुख दसभुजा,

मृत्युंजय अजर अमर,

ना कोई उनसा यहाँ,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा,

जय भैरव नटराजा,

रूद्र सदा शिवराजा,

नीलकंठ शंकरा,

शंभु शंभु देवा.....

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

शंभु शंभु देवा

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

बम बम भोले नाथ

शंभु शंभु देवा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।