शिव शिव जपा कर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शिव शिव शिव जपा कर,

हर हर हर हर रटा कर,

चंचल मन, कर चिन्तन.....

क्या मैं दे दूँ रंग की रंगाई,

नेग भरूँ क्या मूरत दिखाई,

किस विध भोले करूँ रिझाई,

सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

सिद्धि साधन ध्यान समर्पण,

तन मन धन अर्पण,

शिव शिव शिव शिव जपा कर,

हर हर हर हर रटा कर,

शिव शिव शिव शिव जपा कर,

हर हर हर हर रटा कर....

पाहन जड़ चेतन हो जाता,

काल नाचता सबै नाचता,

मौन ही भीतर अनहद गाता,

सारा विष अमृत हो जाता,

लौटा सोटा और कमण्डल,

डमरू की डम डम,

शिव शिव शिव शिव जपा कर,

हर हर हर हर रटा कर,

शिव शिव शिव शिव जपा कर,

हर हर हर हर रटा कर.....

चंचल मन, कर चिन्तन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।