ओ शंकर भोले

शिवा त्रिपाठी एवम जान्हवी विश्वकर्मा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

धुन- बाबुल प्यारे

ओ शंकर भोले... जपती तुमको मैं हरदम,

दें दो सुन्दर कोई जतन, जिससे फिर मिल जायें हम.. हो..

ओ शंकर भोले......

त्रेता युग में भूल हुई थी, जाँचा था रामजी को, ओ...

रूप सीता का लिया, त्यागे मुझको ही शिवा,

ऐसे बीता मेरा वो जनम...हो..

ओ शंकर भोले.....

दक्ष पिता जब बने घमंडी, भूले सती और शिव को,

जब मैं वेदी को चली, सबमें आयी खलबली,

जला अग्नी में मेरा बदन...हो..

ओ शंकर भोले.....

पार्वती के रूप में जन्मी, आऊँगी तेरे ही आँगन... ओ..

तेरी पूजा मैं करूँ, काम दूजा न करूँ,

तुझपे वारूंगी अपना ये तन... हो..

ओ शंकर भोले.....

शिवरात्रि के शुभ अवसर पर, आये शंभु बराती, ओ...

ताने लोगों से मिले, वर जोगी से मिले,

सारे संसार के भगवन हो..

ओ शंकर भोले.....

स्वर - शिवा त्रिपाठी एवम जान्हवी विश्वकर्मा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।