शिव शम्भु शंकर भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

एक पुष्प ओर एक बेलपत्र,

एक लोटा जल की दार,

इतनी सी भक्ति से होता भक्तों का उद्धार,

नाम है ऊँचा देवों में इनका,

वंदना करते इनकी देवी देवता,

शिव शम्भु शंकर भोले,

शिव शम्भु शंकर भोले,

हाथों में डमरू जिनके काल नाग साथ,

लीला अपरम्पार है जिनकी वो है भोलेनाथ,

शिव शम्भु शंकर भोले………..

शंकर सबके संकट हरते,

बाधाओं को दूर वो करते...-2

योगी मुनि सब ध्यान लगावे,

शारद नारद भी शीश नवावे,

शिव शम्भु शंकरा भोले,

हम सबके संकटहारि,

हम सबके आप ही स्वामी,

जय जय जय अनंतकारी,

जय जय जय जय अविनाशी,

शिव शम्भु शंकरा भोले....

उनसे ही है दुनिया सारी,

शृष्टि के वो है पालनहारी,

नाम है ऊँचा देवों में इनका,

वंदना करते इनकी देवी देवता,

एक पुष्प ओर एक बेलपत्र,

एक लोटा जल की दार,

इतनी सी भक्ति से होता भक्तों का उद्धार…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।