शिव मेरे बोल अखियां खोल

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

खोलदा ना अखियां भोलेनाथ क्यू,

पुकार के तुझे मैं हार गई हूँ,

हार गई हूँ मैं तो हार गई हूँ,

दिल और चैन तुझ पर वार गई हूँ,

शिव मेरे बोल अखियां खोल गौरा तेरे सामने‌ खड़ी,

गौरा तेर सामने खड़ी ओ भोले तेरी सखी तेरे सामने खड़ी...

अखियां ना खोलोगे तो डमरू बन जाऊगी,

डमरू बन जाऊगी तो हाथो में समाऊँगी,

डमरू ना टोल अखियां खोल गोरा तेरे सामने खड़ी,

शिव मेरे बोल अखियां खोल गौरा तेरे सामने‌ खड़ी,

गौरा तेर सामने खड़ी ओ भोले तेरी सखी तेरे सामने खड़ी....

अखियां ना खोलोगे तो चंदा बन जाऊँगी,

चंदा बन जाऊंगी तो माथे पर समाऊँगी,

चंदा को ना टोल अखियां खोल गोरा तेरे सामने खड़ी,

शिव मेरे बोल अखियां खोल गौरा तेरे सामने‌ खड़ी,

गौरा तेर सामने खड़ी ओ भोले तेरी सखी तेरे सामने खड़ी....

अंखिया ना खोलोगे टी नागिन बन जाऊंगी,

नागिन बन जाऊंगी तो गले में समाऊँगी,

नागिन को ना टोल अखियां खोल गोरा तेरे सामने खड़ी,

शिव मेरे बोल अखियां खोल गौरा तेरे सामने‌ खड़ी,

गौरा तेर सामने खड़ी ओ भोले तेरी सखी तेरे सामने खड़ी....

आंखे नही खोलोगे तो गंगा बन जाऊंगी,

गंगा बन जाऊंगी तो जटा में समाऊँगी,

गंगा को ना टोल अखियां खोल गोरा तेरे सामने खड़ी,

शिव मेरे बोल अखियां खोल गौरा तेरे सामने‌ खड़ी,

गौरा तेर सामने खड़ी ओ भोले तेरी सखी तेरे सामने खड़ी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।