गौरा बैठी दुल्हन बनके

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो,

आज मेरा दूल्हा आवेगो आज मेरा भोला आवेगो,

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो......

शीश गौरा के जुड़ा सोहै,

के भोला गंगा वहावेगो आज मेरा दूल्हा आवेगो,

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो......

माथे गौरा के बिंदिया सोहै,

के भोला चंदा सजावेगो आज मेरा भोला आवेगो,

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो......

गले गौरा के हरवा सोहै,

के भोला नाग सजावेगो आज मेरा भोला आवेगो,

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो......

हाथ गौरा के कंगना सोहै,

के भोला डमरू बजावे हो आज मेरा भोला आवेगो,

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो......

पैर गौरा के पायल सोहै,

के भोला घुंगरू बजावेगो आज मेरा भोला आवेगो,

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो......

रंग गौरा के साड़ी सोहै,

के भोला बाघमबर सजावेगो आज मेरा भोला आवेगो,

गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरा दूल्हा आवेगो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।