गोरा बैठ मेरी नंदी पर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा,

सैर पर्वत की करा दूंगा, सैर पर्वत की करा दूंगा,

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा॥

दिल का ला दूंगा गोरा री तुझे बिंदिया ला दूंगा,

टीका बिंदी पहन शौक तेरे पूरे करा दूंगा,

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा॥

जूते ला दूंगा गोरा री तुझे नथनी ला दूंगा,

झुमके नथनी पहन शौक तेरे पूरे करा दूंगा,

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा॥

हरवा ला दूंगा गोरा री तुझे माला ला दूंगा,

हरवा माला पहन शौक तेरे पूरे करा दूंगा,

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा॥

तगड़ी ला दूंगा गोरा री तुझको गुच्छा ला दूंगा,

तगड़ी गुच्छा पहन शौक तेरे पूरे करा दूंगा,

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा॥

पायल ला दूंगा गोरा री तुझे बिछुवे ला दूंगा,

पायल बिछुआ पहन शौक तेरे पूरे करा दूंगा,

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा॥

लहंगा ला दूंगा गोरा री तुझे चुनरी ला दूंगा,

लहंगा चुनरी पहन शौक तेरे पूरे करा दूंगा,

गोरा बैठ मेरी नंदी पर सैर पर्वत की करा दूंगा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।