मेरी लगी शंभू से प्रीत

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी लगी शंभू से प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने,

मुझे मिल गया मन का मीत,

ये दुनिया क्या जाने,

क्या जाने क्या जाने,

मेरी लगी शम्भू से प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने....

मां गौरा की सुनो कहानी,

जो है सदाशिव की पटरानी,

तज सती देह उमां कल्याणी,

हिमगिरी के घर जन्मी भवानी,

मैना की हरी सब पीर,

ये दुनिया क्या जाने,

मेरी लगी शम्भू से प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने....

अखियां शिव दर्शन की प्यासी,

मन में है दिन रेन उदासी,

मात-पिता से आज्ञा मांगी,

तप के हेतु हुई बनवासी,

लागी शिव चरणों से प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने,

मेरी लगी शम्भू से प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने.....

कठिन तपस्या मां ने कीन्ही,

शिव ने उमा परीक्षा लीन्ही,

प्रीति उमा की मन में चीन्ही,

तब विवाह की आज्ञा दीन्ही,

तब हुई प्रीत की जीत,

ये दुनिया क्या जाने,

मेरी लगी शम्भू से प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।