पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका, संग भेरू ने लाइ हे,

आगे आगे कालो खेले, पाछे भेरू गोरो हे ओ जी,

पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका....

ऐ हे खड़क खांडो खप्पर हाते, हुई विकराल काली हे,

योगी भूत पिचासन नाचे, हे तीन लोक की माई हे ओ जी,

पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका....

ऐ हे तीन लोक और चौदह भवन में, माता थारो राज हे,

देवी देवता सरणे आया, शंकर शीश नमाया हे ओ जी,

पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका....

ऐ हे ढोल नंगाड़ा नोपत बाज्या, तीनो देव थारे नाच्या हे,

भगता रे बेले आवो ऐ कालका, अब देरी ना लगावो हे ओ जी,

पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका....

ऐ हे धरम भगत थारी महिमा गावे, चरना शीश नमावे हे,

जो कोई चरना आवे मात रे, जनम सफल हो जावे हे ओ जी,

पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।