मैं बेटी हू महाकाल की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव समान दाता नही, विपद निवारण हार,

लज्जा मोरी राखियो शिव नन्दी के असवार,

ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय……..

शिव को जीवन सौप दिया,

अब चिंता नही है काल की…….

भोले बाबा मेरे है,

मैं बेटी हू महाकाल की,

बम भोले बम भोले बम बम,

ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय……..

तन मन धन अर्पित किया,

माँ गोरा के लाल को…….

थाम लिया है महादेव ने,

मेरे नन्हे हाथो को……….

जपती हू मैं निश दिन माला……

ओ

जपती हू मैं निश दिन माला,

मृतुन्जय मुंड माल की,

भोले बाबा मेरे है मैं बेटी हू महाकाल की………

कण्ठ में मेरे नीलकण्ठ को,

नांद सुनाई देता है,

हर धड़कन में महाँकाल तेरा,

नाम सुनाई देता है…………

तन पे मैंने भस्म रमाई,

धक धक धुनि ज्वाला की,

भोले बाबा मेरे हैं मैं बेटी हूँ महाँकाल की……….

जग में किसकी प्यास बुझी है, जग तो जागा सपना है,

शिव चरणों मे आयी हूँ मैं, शिव ही केवल अपना है,

जय हो जय हो अवन्त वासी कालो के महाँकाल की,

भोले बाबा मेरे हैं मैं बेटी हूँ महाँकाल की………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।